दलीप ट्रॉफी का फाइनल मैच चेन्नई के एम ए चिदंबरम स्टेडियम में ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है। इस मैच में करुण नायर को साउथ जोन के प्लेइंग XI में मौका नहीं मिला। दलीप ट्रॉफी फाइनल से बाहर होने के बाद नायर ने घरेलू टूर्नामेंट में खेलने का फैसला किया। नायर ने 7 सितंबर को बेंगलुरु में डॉ. के थिम्मप्पैया मेमोरियल टूर्नामेंट में छत्तीसगढ़ के खिलाफ KSCA सेक्रेटरी XI की ओर से बैटिंग करते हुए दमदार शतक ठोक दिया। यह रेड-बॉल से खेला जाने वाला एक लोकल टूर्नामेंट है, जिससे आमतौर पर कर्नाटक की टीम अपनी रणजी ट्रॉफी की तैयारियां शुरू करती है।
साउथ जोन की प्रैक्टिस में शामिल थे करुण नायर
करुण नायर शनिवार को एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में दलीप ट्रॉफी फाइनल से ठीक एक दिन पहले साउथ जोन की प्रैक्टिस में शामिल थे। लेकिन जब उन्हें पता चला कि लगातार दूसरे मैच की प्लेइंग-11 में भी उन्हें जगह नहीं दी गई है, तो वह साउथ जोन की टीम को छोड़कर कर्नाटक वापस चले गए। इसके बाद सोमवार को उन्होंने बेंगलुरु में छत्तीसगढ़ के खिलाफ 'KSCA सेक्रेटरी XI' के लिए खेलते हुए शानदार शतक जड़ा। इस शतकीय पारी के साथ ही उन्होंने चयनकर्ताओं को करार जवाब दिया है।
विक्रम वर्मा ने करुण नायर के बाहर होने पर क्या कहा?
दलीप ट्रॉफी के दूसरे दिन का खेल खत्म होने के बाद साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा ने कहा कि करुण नायर निजी कारणों की वजह से टीम छोड़कर गए हैं। लेकिन X (ट्विटर) पर करुण नायर के पोस्ट से ऐसा लगा कि असली वजह कुछ और ही है। इस बात से अब साउथ जोन की टीम में खिलाड़ियों के चुने जाने और न चुने जाने के अजीब फैसलों पर विवाद शुरू हो गया है।
साउथ जोन के कोच विक्रम वर्मा ने कहा कि दरअसल हमने एक अच्छा कॉम्बिनेशन चुना था क्योंकि हर टीम में दो बाएं हाथ के स्पिनर हैं। इसलिए हमें लगा कि मिडिल ऑर्डर में बाएं हाथ का बल्लेबाज होने से हमें उन पर दबदबा बनाने का अच्छा मौका मिलेगा। इसलिए हमने फिर वही सोचा कि टीम के लिए सबसे अच्छा क्या है। अब जबकि देवदत्त पडिक्कल वापस आ गए हैं तो टीम कॉम्बिनेशन का सवाल था। करुण को बाहर रखना बहुत मुश्किल है लेकिन हमारे पास यही संयोजन है।
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